Naga bharath daka Autobiography in Hindi अंतरिक्ष क्रांति के सूत्रधार: नागा भरत डाका की प्रेरक जीवन-गाथा

Naga bharath daka Autobiography in Hindi अंतरिक्ष क्रांति के सूत्रधार: नागा भरत डाका की प्रेरक जीवन-गाथा

Naga bharath daka Autobiography in Hindi अंतरिक्ष क्रांति के सूत्रधार: नागा भरत डाका की प्रेरक जीवन-गाथा

18 नवंबर 2022 की वह शाम भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई। श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से जब भारत का पहला private rocket Vikram-S आसमान की गहराइयों को चीरते हुए ऊपर उठा, तो असल में एक rocket भर launch नहीं हुआ था एक नए युग का जन्म हो रहा था। और फिर जुलाई 2026 में 'मिशन आगमन' के तहत जब पूर्ण-विकसित 'विक्रम-1' ने Low Earth Orbit में सफलतापूर्वक कदम रखा, तो भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने दुनिया के सामने अपना परचम गाड़ दिया। इस ऐतिहासिक सफलता की नींव में दो पूर्व इसरो वैज्ञानिकों का दिमाग काम कर रहा था एक पवन कुमार चंदना, और दूसरे, जिन्होंने इस पूरे अभियान को अपनी तकनीकी सूझबूझ और परिचालन कुशलता से सींचा नागा भरत डाका।

नागा भरत डाका भारत की अग्रणी निजी aerospace company Skyroot Aerospace के सह-संस्थापक और chief operating officer (COO) हैं। एक ऐसे engineer और उद्यमी, जिन्होंने देश को Space Technology में आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अपनी सुरक्षित और प्रतिष्ठित career को दांव पर लगा दिया। आइए, उनके बचपन से लेकर इसरो के अनुभव, Skyroot की स्थापना और भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के उनके संकल्प तक इस पूरे सफर को करीब से देखते हैं।

प्रारंभिक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

नागा भरत डाका का जन्म 8 सितंबर 1989 को आंध्र प्रदेश के एक Upper Middle Class परिवार में हुआ। उनका बचपन आंध्र प्रदेश के दो सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहरों तिरुपति और विशाखापत्तनम में बीता। जहाँ हमउम्र बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते थे, वहीं भरत के भीतर मशीनों के प्रति एक अलग ही आकर्षण था घर के पुराने radio और घड़ियों को खोलकर उनकी आंतरिक बनावट समझने की जिज्ञासा। माता-पिता ने उनके इस खोजी स्वभाव और गणित के प्रति रुझान को समय रहते पहचान लिया और उन्हें प्रयोग करते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। दसवीं कक्षा में परिवार हैदराबाद आकर बस गया, और यही शहर आगे चलकर उनकी जिगर Higher Education और सपनों की असली कर्मभूमि बना।

शैक्षणिक उत्कृष्टता: IIT मद्रास का सफर

2007 में भरत ने देश की दो सबसे कठिन Engineering प्रवेश परीक्षाओं में असाधारण सफलता हासिल की AIEEE में अखिल भारतीय 91वीं रैंक और IIT-JEE में 165वीं रैंक। इसके बाद उन्होंने IIT मद्रास में दाखिला लिया, जहाँ उन्होंने Electrical Engineering में Bachelor Degree और Microelectronics and VLSI Design में Master degree की dual degree 2012 में पूरी की। यहीं उन्होंने Semiconductor Technology, उन्नत डिजिटल प्रणालियों और Field-Programmable Gate Array system की बारीकियों में महारत हासिल की वही तकनीकी नींव, जिसने आगे चलकर उन्हें rocket के 'electrinic Brain' को गढ़ने की काबिलियत दी।

इसरो का सफर: एवियोनिक्स के शिल्पकार

2012 में IIT मद्रास से graduate होते ही भरत का selection ISRO में हुआ। उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में 'Flight Computer Engineer' के पद पर तैनात किया गया इसरो का वह केंद्र, जहाँ भारत के सभी Launch Vehicle Design और निर्मित होते हैं। यहाँ उन्हें भारतीय रॉकेट्स के लिए 'एवियोनिक्स' (Avionics) modules के desinn, विकास और hardware-farmware एकीकरण की जिम्मेदारी सौंपी गई।

एवियोनिक्स क्या है

यह किसी भी रॉकेट की वह इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली होती है जो उसके Guidance, Navigation और Control को संभालती है। इसके बिना कोई भी रॉकेट अंतरिक्ष में सीधा नहीं जा सकता।

VSSC में करीब ढाई साल 2012 से अप्रैल 2015 तक भरत ने Flight Computer Group में काम किया और indian launching vehicle के लिए कई एवियोनिक्स मॉड्यूल्स डिजाइन किए, जिन्होंने Real Time Data Processing और in-Flight स्थिरता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई। दिलचस्प बात यह है कि यहीं उनकी दोस्ती पवन कुमार चंदना से हुई जो न सिर्फ सहकर्मी थे, बल्कि उनके Flatmate भी। देर रात दोनों युवा वैज्ञानिक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में हो रहे बदलावों पर घंटों चर्चा करते।

सेमीकंडक्टर की दुनिया में एक पड़ाव

अप्रैल 2015 में इसरो से विदा लेने के बाद भरत ने सीधे उद्यमिता का रास्ता नहीं पकड़ा। इसके बजाय उन्होंने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को और तराशने के लिए मई 2015 में प्रसिद्ध semiconductor company Xilinx join की, जहाँ वे senior product application engineer तौर पर video और PCI Express IP समाधानों पर काम करते रहे। यह तीन साल का पड़ाव उनके लिए एक ठहराव नहीं, बल्कि तैयारी का दौर साबित हुआ क्योंकि इसी दौरान अमेरिका में elon musk की SpaceX जैसी कंपनियाँ अंतरिक्ष को निजी क्षेत्र के लिए खोल रही थीं और launch की लागत नाटकीय रूप से घटा रही थीं। भरत और चंदना दोनों देख रहे थे कि भारत में दुनिया की सबसे बेहतरीन अंतरिक्ष प्रतिभाएं होने के बावजूद कोई स्वदेशी निजी रॉकेट कंपनी नहीं थी, और इसरो जैसी सरकारी संस्थाओं पर चंद्रयान-गगनयान जैसे राष्ट्रीय अभियानों का इतना दबाव था कि commercial costumers को instant launch spot मिलना मुश्किल था।

एक साहसिक निर्णय: स्काईरूट की नींव

अगस्त 2018 में भरत ने जाइलिनक्स को अलविदा कहा, और उसी साल जून में पवन कुमार चंदना के साथ मिलकर हैदराबाद में Skyroot Aerospace की नींव रखी। ध्यान रहे, यह वह दौर था जब भारत सरकार ने अंतरिक्ष क्षेत्र के निजीकरण की कोई औपचारिक घोषणा भी नहीं की थी कोई नीतिगत ढांचा नहीं, investors 'Deep-Tech' में पैसा लगाने से कतराते, और दो युवा इंजीनियरों के पास सिर्फ Experience और एक Vision। भरत ने कंपनी में COO का पद संभाला उनका जिम्मा था rockets का technical development, एवियोनिक्स lab की स्थापना, guided navigation system का निर्माण और संपूर्ण परिचालन। उन्होंने scratch से एक ऐसी team खड़ी की, जो दुनिया के सबसे उन्नत rockets का मुकाबला करने का माद्दा रखती थी।

स्काईरूट की मील के पत्थर उपलब्धियां इस तरह रहीं

रमन और धवन इंजन (2020-2021): स्काईरूट भारत की पहली निजी कंपनी बनी जिसने पूरी तरह स्वदेशी रॉकेट इंजन 'रमन-1' का सफल परीक्षण किया, और बाद में देश का पहला निजी cryogenic engine 'धवन-1' test किया।

मिशन प्रारंभ (नवंबर 2022): Skyroot ने भारत का पहला निजी Sub-orbital mission 'vikram-S' launch किया पहली ही कोशिश में 100% सटीकता के साथ।

मिशन आगमन और विक्रम-1 (जुलाई 2026): Skyroot का fully-developed orbital rocket 'Vikram-1' सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित हुआ। इस उपलब्धि ने Skyroot को भारत का पहला Aerospace Unicorn बना दिया, जिसमें आज 1,000 से ज्यादा पेशेवर काम कर रहे हैं।

Vikram-1 खुद भी engineering का एक कमाल का नमूना है 3D-printed engine जो rocket का वजन 50% तक घटाते हैं और उत्पादन की रफ्तार 80% तक बढ़ाते हैं, all carbon composit structure, fisrt 3 stages में solid fuel और last stage में सटीक orbital maneuver के लिए hypergololic liquid engine। यह रॉकेट निचली कक्षा में 350 kg और sun synchronous orbit में 260 kg तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है यानी सीधे तौर पर छोटे उपग्रहों के वैश्विक बाजार को साधने के लिए बनाया गया।

✨ CORE VISION

🚀 नागा भरत डाका का विजन: "Opening Space for All"

भरत का vision सिर्फ rocket launch करने तक सीमित नहीं है, वे अंतरिक्ष के अनुप्रयोगों के जरिए पृथ्वी पर इंसानी जीवन बेहतर बनाना चाहते हैं। उनका लक्ष्य अंतरिक्ष को अधिकतम सुलभ और लोकतांत्रिक बनाना है, और यह vision तीन Main Pillars पर टिका है:

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1. सस्ती और त्वरित अंतरिक्ष यात्रा

Satellite launch की लागत इतनी घटाना कि एक छोटा start-up या विश्वविद्यालय भी अपना satellite अंतरिक्ष में आसानी से भेज सके।

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2. In-space Services & Data Centre

भविष्य में अंतरिक्ष के भीतर ही data centers और repairing programs की जरूरत होगी। भरत स्काईरूट को केवल rocket company नहीं, बल्कि अंतरिक्ष की संपूर्ण Logistics-Infrastructure बनाना चाहते हैं।

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3. आत्मनिर्भर भारत

Global companies को अपने satellite launch के लिए अमेरिका या यूरोप पर निर्भर न रहना पड़े, भारत खुद दुनिया का सबसे भरोसेमंद 'Space Hub' बने।

निष्कर्ष: युवाओं के लिए एक बेजोड़ प्रेरणा

नागा भरत डाका की यह जीवन-गाथा एक बात साबित करती है जब असाधारण शैक्षणिक योग्यता के साथ देश के लिए कुछ बड़ा करने का जज्बा जुड़ जाता है, तो इतिहास रचा जाता है। तिरुपति और विजाग की गलियों से निकलकर, IIT और इसरो जैसी संस्थाओं में अपनी चमक बिखेरने के बाद, भारत के पहले निजी अंतरिक्ष साम्राज्य को खड़ा करने वाले भरत आज लाखों युवा इंजीनियरों के लिए एक आदर्श हैं। उनका सफर सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों को पाने के लिए स्थापित और सुरक्षित रास्तों को छोड़कर अनजाने-पथरीले रास्तों पर चलने का साहस दिखाना ही सच्ची उद्यमिता है। नागा भरत डाका और उनकी team जिस रफ्तार से नए क्षितिज छू रही है, उसे देखकर यह तय है कि भारतीय अंतरिक्ष का भविष्य बेहद सुरक्षित और उज्ज्वल हाथों में है।

📖 पवन कुमार चंदना जीवनी पढ़ें:

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