Yash Thakur Autobiography in Hindi | यश ठाकुर जीवनी

Yash Thakur Autobiography in Hindi Yash Thakur: नागपुर की गलियों से Team India तक का सफर

Yash Thakur Autobiography in Hindi
 Yash Thakur: नागपुर की गलियों से Team India तक का सफर

एक ऐसी कहानी जो सिर्फ एक Fast Bowler की नहीं, बल्कि एक बेटे के उस वादे की है जो उसने अपने पिता से निभाया  28 दिसंबर 1998 को कोलकाता में जन्मा एक लड़का, जो अपने बचपन के हीरो MS Dhoni की तरह Wicketkeeper बनना चाहता था, आज भारत की senior राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने से बस एक कदम दूर खड़ा है। यश ठाकुर विदर्भ (Vidarbha) के Right-Arm Fast-Medium Bowle का यह सफर किसी फ़िल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। लखनऊ सुपर जायंट्स से पंजाब किंग्स तक, और घरेलू क्रिकेट के धूल भरे मैदानों से लेकर करोड़ों की नीलामी तक इस सफर का हर मोड़ मेहनत, संघर्ष और एक पिता के अधूरे सपने की कहानी कहता है। सबसे खास बात यह है कि यह कहानी ठीक इसी हफ्ते, जुलाई 2026 में, अपने सबसे भावुक मोड़ पर पहुंची है। आइए शुरुआत से समझते हैं।

From Kolkata to Nagpur (कोलकाता से नागपुर तक)

यश का जन्म पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ, लेकिन उनका पूरा पालन-पोषण महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ, जहां उनके पिता रविसिंह ठाकुर एक छोटे व्यवसायी थे। परिवार मध्यमवर्गीय था, और पैसों की तंगी अक्सर रहती थी, लेकिन जब भी यश को नई किट या कोचिंग फीस की ज़रूरत पड़ी, पिता ने कभी हाथ पीछे नहीं खींचे। नागपुर की गलियों और Vidarbha Cricket Association के मैदानों ने ही उस प्रतिभा को पहली बार तराशा, जो आज देश के सामने है।

The Dhoni Dream and a Coach's Advice (धोनी का सपना और कोच की सलाह)

दिलचस्प बात यह है कि यश ने गेंदबाज़ के रूप में करियर शुरू ही नहीं किया था। 2011 के World Cup में भारत की जीत और MS Dhoni को देखकर प्रभावित होकर उन्होंने उसी साल Pravin Hinganikar Cricket Academy में एक Wicketkeeper-Batter के तौर पर training शुरू की थी वे धोनी की तरह स्टंप के पीछे खड़े होने और नीचे आकर छक्के जड़ने का सपना देखते थे। पर कोच प्रवीण हिंगणीकर ने उनकी ऊंचाई और स्वाभाविक गति को पहचानते हुए उन्हें दस्ताने उतारकर गेंद थामने की सलाह दी यह सलाह यश के करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुई। यश खुद मानते हैं कि अगर उस दिन यह सलाह न मिली होती, तो शायद वे आज इस मुकाम पर न होते।

The Two-Year Gamble (दो साल का जुआ)

12वीं की परीक्षा के बाद यश के सामने एक कठिन चुनाव था पढ़ाई या क्रिकेट। उन्होंने जोखिम उठाते हुए पढ़ाई से 2 साल का ब्रेक लिया, ताकि पूरा समय अपनी गेंदबाज़ी, फिटनेस और स्पीड पर लगा सकें। मध्यमवर्गीय परिवार में यह फैसला आसान नहीं था, पर माता-पिता ने पूरा साथ दिया।

Domestic Rise: Numbers That Speak (घरेलू क्रिकेट में उभार)

मेहनत जल्द रंग लाई। 2016 में यश ACC Under-19 Asia Cup जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा बने, जहां उन्होंने 5 मैचों में 9 विकेट लिए। 25 फरवरी 2017 को Vijay Hazare Trophy से List A डेब्यू हुआ, इसके बाद 28 नवंबर 2018 को Ranji Trophy से First-Class और फरवरी 2019 में Syed Mushtaq Ali Trophy से T20 डेब्यू। असली उभार आया 2021-22 के Vijay Hazare Trophy सीज़न में, जहां यश विदर्भ के लिए सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ बने 7 मैचों में 18 विकेट, औसत सिर्फ 20। इसी टूर्नामेंट के पहले ही दिन, 8 दिसंबर 2021 को, हिमाचल प्रदेश के खिलाफ उन्होंने अपना पहला 5-विकेट हॉल (5/53) लिया। अगले ही साल 2022-23 के Syed Mushtaq Ali Trophy में वे फिर विदर्भ के सबसे सफल गेंदबाज़ रहे (15 विकेट), और उत्तराखंड के खिलाफ सिर्फ 11 रन तथा दिल्ली के खिलाफ क्वार्टरफाइनल में सिर्फ 9 रन डिफेंड कर टीम को जिताया यही Death-Over महारत आगे चलकर उनकी पहचान बनी।

From Net Bowler to IPL Debutant (नेट बॉलर से IPL डेब्यू तक)

2020 में यश सिर्फ Punjab Kings के लिए एक Net Bowler के तौर पर IPL bubble में गए थे। तीन साल बाद, 2023 की नीलामी में Lucknow Super Giants (LSG) ने उन्हें बेस प्राइस ₹45 लाख में खरीदा। 3 अप्रैल 2023 को Chennai Super Kings के खिलाफ Chepauk Stadium में उनका IPL डेब्यू हुआ यश ने बाद में बताया कि उस दिन स्टेडियम का शोर उनके कानों के लिए असहनीय था, खासकर जब MS Dhoni बल्लेबाज़ी करने उतरे और महज़ 3 गेंदों पर 12 रन जड़ दिए। उनका पहला IPL विकेट 7 अप्रैल 2023 को Sunrisers Hyderabad के खिलाफ आया डेब्यू के ठीक 4 दिन बाद। अपने डेब्यू सीज़न में यश ने 9 मैचों में 13 विकेट लिए, जिसमें Punjab Kings के खिलाफ एक यादगार 4-विकेट स्पेल भी शामिल था।

The Historic Five-For (ऐतिहासिक 5 विकेट)

7 अप्रैल 2024 को Gujarat Titans के खिलाफ यश ने 5/30 का धमाकेदार स्पेल फेंका यह उस पूरे IPL 2024 सीज़न का सबसे पहला 5-विकेट हॉल था। उस सीज़न उन्होंने 10 मैचों में 11 विकेट लिए, और LSG के लिए दो सीज़न में कुल मिलाकर 19 मैचों में 24 विकेट का आंकड़ा छुआ। आज, मध्य-2026 तक, उनके पूरे IPL करियर का आंकड़ा 22 मैचों में 27 विकेट तक पहुंच चुका है, और 5/30 अब भी उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन बना हुआ है।

A Father's Final Wish (पिता की आखिरी ख्वाहिश)

पर इसी दौर में यश की ज़िंदगी का सबसे कठिन पल भी आया। 2023 में उनके पिता रविसिंह ठाकुर का अचानक दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। पिता ही यश के सबसे बड़े सपोर्टर थे, और उनकी सबसे बड़ी ख्वाहिश थी अपने बेटे को नीली जर्सी में देश के लिए खेलते देखना। उनके जाने के बाद माँ काजल ठाकुर और बड़ी बहन ने यश को संभाला और आगे बढ़ने का हौसला दिया।

The Jeddah Auction (जेद्दा की नीलामी)

2025 की मेगा नीलामी सऊदी अरब के जेद्दा शहर में हुई, जहां Gujarat Titans और Punjab Kings (PBKS) के बीच यश के लिए ज़ोरदार बिडिंग वॉर छिड़ी। आख़िरकार PBKS ने बाज़ी मारी और उन्हें ₹1.6 करोड़ में अपनी टीम में शामिल किया। 2025 सीज़न में यश को सिर्फ 2 मैच खेलने को मिले, फिर भी PBKS उस साल फाइनल तक पहुंचा, और टीम ने 2026 सीज़न के लिए भी उन्हें बरकरार रखा।

The Call That Changed Everything (वो कॉल जिसने सब बदल दिया)

और फिर आया वह पल जिसका इंतज़ार था। India A के साथ श्रीलंका दौरे से लौटते हुए, नागपुर एयरपोर्ट पर अपना सामान उठाने का इंतज़ार करते हुए यश को एक फोन कॉल आया ज़िम्बाब्वे के खिलाफ भारत की senior T20I टीम में उनके चयन की खबर। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली इस टीम में यश और आशोक शर्मा दो uncapped तेज़ गेंदबाज़ों के रूप में चुने गए, और यह सीरीज़ ठीक आज, 23, 25 और 27 जुलाई 2026 को हरारे में खेली जा रही है। यश ने बाद में कहा कि उन्हें अब तक यकीन नहीं हो रहा कि यह सच है, और पूरा घर खुश है क्योंकि यह कॉल-अप असल में उनके पिता के उसी अधूरे सपने की तामील है, जो वे खुद देखने के लिए अब मौजूद नहीं हैं।

The Fearless Mindset (निडर मानसिकता)

IPL के करोड़ों के मंच ने यश को सिर्फ पैसा और पहचान ही नहीं दी, बल्कि एक नई मानसिकता भी दी। उनका मानना है कि दुनिया के सबसे खतरनाक बल्लेबाज़ों के सामने गेंदबाज़ी करने के अनुभव ने उनके भीतर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का डर पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब उनका लक्ष्य है Yorker, Knuckle Ball और Slower Bouncer जैसे हथियारों को 19वें-20वें ओवर के लिए और पैना करना, ताकि वे किसी भी कप्तान के लिए दबाव के हालात में भरोसे का 'Go-To Bowler' बन सकें चाहे सामने कोई भी टीम या बल्लेबाज़ क्यों न हो। यही सोच अब उन्हें घरेलू क्रिकेट के स्टार से टीम इंडिया के भावी Death-Over Specialist की तरफ ले जा रही है।

Closing Thought (अंतिम बात)

यश ठाकुर की कहानी हमें यह सिखाती है कि किस्मत मेहनत करने वालों का साथ ज़रूर देती है, बस थोड़ा वक़्त लेती है। नागपुर के एक सामान्य मैदान से निकलकर, विकेटकीपिंग के दस्ताने उतारकर, दो साल की पढ़ाई कुर्बान करके, नेट बॉलिंग से लेकर करोड़ों की नीलामी तक, और पिता को खोने के दर्द से गुज़रकर आज जब यश नीली जर्सी की दहलीज़ पर खड़े हैं, तो यह सिर्फ उनकी नहीं हर उस बेटे की जीत है जो अपने माता-पिता का अधूरा सपना पूरा करने की ज़िद रखता है।

हरारे के मैदान में जब भी यश गेंद हाथ में लेकर दौड़ेंगे, वहां सिर्फ एक Fast Bowler नहीं होगा वहां एक बेटा होगा, जो अपने पिता से किया वादा निभा रहा होगा। और यही वजह है कि यश ठाकुर का सफर अभी खत्म नहीं, बल्कि असल मायनों में अभी शुरू हुआ है।


Tags : Yash Thakur Autobiography in Hindi, Yash thakur kaun hai, Yash thakur networth, Yash thakur background, Yash thakur family

Article अच्छा लगने पर Share करें और अपनी प्रतिक्रिया Comment के रूप में अवश्य दें, जिससे हम और भी अच्छे लेख आप तक ला सकें। यदि आपके पास भी कोई लेख, कहानी, किस्सा हो तो आप हमें भेज सकते हैं, पसंद आने पर लेख को आपके नाम के साथ MeriZindagi.com पर पोस्ट किया जाएगा, अपने सुझाव आप kamalrules90@Gmail.Com पर भेजें


Previous
Next Post »

Sign up here with your email