Abhijit dipke autobiography in Hindi Abhijeet Dipke Biography in Hindi कॉकरोच जनता पार्टी: व्यंग्य से राष्ट्रीय आंदोलन तक अभिजीत दीपके और CJP की पूरी कहानी
मई 2026 में भारतीय राजनीति के हाशिये पर एक अजीबोगरीब घटना घटी। सोशल मीडिया पर एक मीम और व्यंग्य के तौर पर शुरू हुआ 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) नाम का एक अभियान कुछ ही हफ्तों में करोड़ों युवाओं तक पहुंच गया, और जुलाई आते-आते यह दिल्ली की सड़कों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव तक जा पहुंचा। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में हैं 30 वर्षीय अभिजीत दीपके एक राजनीतिक कम्युनिकेशन रणनीतिकार, जिन्होंने सत्ता और न्यायपालिका की एक टिप्पणी को अपनी पहचान बना लिया।
नीट (NEET) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बढ़ती बेरोज़गारी और छात्रों की हताशा इन मुद्दों ने इस डिजिटल मज़ाक को एक वास्तविक जन-आंदोलन में बदल दिया। नीचे अभिजीत दीपके का परिचय, CJP के बनने की असल वजह, अब तक हुए प्रदर्शनों का ब्योरा, पार्टी का फंडिंग मॉडल, और आंदोलन के सामने खड़ी चुनौतियों को तथ्यों की पुष्टि के साथ बताया गया है।
अभिजीत दीपके कौन हैं?
अभिजीत दीपके का जन्म 29 सितंबर 1995 को महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) में हुआ। पेशे से वे एक राजनीतिक कम्युनिकेशन रणनीतिकार हैं, न कि कोई परंपरागत नेता न ही वे किसी राजनीतिक घराने से आते हैं। मई 2026 में CJP की स्थापना के बाद वे अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए।
वे जन-जन तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स और व्यंग्यात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हैं, जिसकी वजह से वे भारत के जेन-ज़ी और मिलेनियल्स के बीच एक प्रमुख चेहरा बन चुके हैं।
पेशेवर पृष्ठभूमि
CJP से पहले दीपके ने पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक कम्युनिकेशन में काम किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम का हिस्सा रहे 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान मीम-आधारित डिजिटल कैंपेन बनाने में उनकी भूमिका थी। इसी दौरान वे दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय में कम्युनिकेशन फेलो और बाद में दिल्ली शिक्षा विभाग के कम्युनिकेशन सलाहकार भी रहे। 2023 में उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए AAP छोड़ दी। वर्तमान में वे पूरी तरह से CJP के राष्ट्रीय संयोजक और प्रमुख प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय हैं।
शिक्षा
स्कूली शिक्षा उन्होंने छत्रपति संभाजीनगर से पूरी की।
स्नातक की पढ़ाई पुणे से जनसंचार और पत्रकारिता (Journalism) में की।
इसके बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका गए रिपोर्ट्स के अनुसार 2024 के आसपास उन्होंने वहां आवेदन किया और बोस्टन यूनिवर्सिटी से 'पब्लिक रिलेशंस' में मास्टर्स डिग्री हासिल की। CJP आंदोलन तेज़ होने के वक्त वे अपनी पढ़ाई लगभग पूरी कर चुके थे और बोस्टन में नौकरी तलाश रहे थे।
जाति और पारिवारिक पृष्ठभूमि
दीपके ने कई साक्षात्कारों में जिनमें अमेरिकी न्यूज़ नेटवर्क NPR को दिया इंटरव्यू भी शामिल है खुलकर बताया है कि वे एक दलित परिवार से आते हैं। उन्होंने अपने बचपन की गर्मियों की छुट्टियां नाना-नानी के गांव में बिताने, संसाधनों की कमी और पानी के लिए मीलों बैलगाड़ी से यात्रा करने के अनुभव साझा किए हैं। उनका परिवार छत्रपति संभाजीनगर के वालुज (MIDC Waluj) इलाके में रहता है और मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से है। जब दीपके ने दिल्ली में राष्ट्रीय आंदोलन शुरू किया, तो सुरक्षा कारणों से महाराष्ट्र पुलिस ने उनके पैतृक घर पर सुरक्षा बढ़ा दी।
गौरतलब है कि उनकी जातीय पहचान खुद विवाद का विषय भी बनी। एक इंटरव्यू के वायरल क्लिप में दीपके ने अपने परिवार को लेकर एक टिप्पणी की, जिसे लेकर कुछ सोशल मीडिया यूज़र्स ने उन पर दलित मतदाताओं को लेकर रूढ़िबद्ध धारणा (stereotyping) फैलाने का आरोप लगाया। वहीं जब कुछ यूज़र्स ने सवाल उठाया कि CJP आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर चुप क्यों है, तो दीपके के "मैं खुद दलित हूं" कहने के बाद उन्हें ऑनलाइन जातिसूचक गालियों का भी सामना करना पड़ा।
CJP की शुरुआत कैसे हुई?
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी और विवाद
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) की उपाधि और फर्जी पेशेवर डिग्रियों के दुरुपयोग से जुड़ी एक अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कुछ टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे युवा हैं जिन्हें रोज़गार या पेशे में जगह नहीं मिलती, और वे मीडिया, सोशल मीडिया या RTI कार्यकर्ता बनकर दूसरों पर हमला करना शुरू कर देते हैं उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना कॉकरोच से की। इसी सुनवाई में उन्होंने सिस्टम पर हमला करने वाले 'परजीवियों' का भी ज़िक्र किया। (जस्टिस सूर्यकांत नवंबर 2025 में जस्टिस बी.आर. गवई के बाद भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बने थे।)
यह comment Social media पर तेज़ी से viral हुई और देशभर के बेरोज़गार युवाओं व डिग्रीधारकों में भारी आक्रोश फैल गया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद CJI सूर्यकांत ने खुद सामने आकर सफाई दी उनका कहना था कि media के एक वर्ग ने उनकी comment को गलत तरीके से पेश किया, और उनका निशाना देश के युवा नहीं बल्कि वे लोग थे जो फर्जी डिग्री के सहारे वकालत जैसे पेशों में घुस आते हैं और बाद में सोशल मीडिया व RTI का सहारा लेकर Blackmailing करते हैं। यह स्पष्टीकरण खुद बहस का हिस्सा बना रहा कुछ ने इसे स्वीकार किया, तो कई आलोचकों ने इसे सिर्फ बचाव की कोशिश बताया।
अपमान को हथियार बनाना
आलोचना के बजाय दीपके ने इस Comment को ही अपनी पहचान बनाने का फैसला किया। 16 मई 2026 को उन्होंने X/ Twitter पर "Cockroach Janta party" के नाम से एक page launch किया — "सभी कॉकरोचों के लिए एक मंच", जिसकी मज़ाकिया 'योग्यता शर्तें' थीं: बेरोज़गार होना, आलसी होना, लगातार ऑनलाइन रहना, और पेशेवर तरीके से रैंट करने में सक्षम होना। पार्टी का नाम खुद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर एक सीधा-सीधा व्यंग्य था। दीपके के मुताबिक, उन्होंने पार्टी की वेबसाइट और घोषणापत्र महज 24 घंटों में Claude और ChatGPT जैसे AI tools की मदद से तैयार किया।
सरकार की कार्रवाई और X अकाउंट पर बैन
पार्टी की लोकप्रियता जैसे-जैसे बढ़ी, 21 मई 2026 को Right to Information की धारा 69(A) के तहत CJP के आधिकारिक X account भारत में ब्लॉक कर दिया गया Electronics and information department ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता का हवाला दिया। जवाब में दीपके ने "Cockroach is Back" नाम से नया अकाउंट बना लिया, जिसने 24 घंटों में डेढ़ लाख से ज़्यादा नए Followers जोड़ लिए। इसी बीच instagram पर पार्टी के followers हफ्ते के भीतर करीब 2 करोड़ तक पहुंच गए।
NEET पेपर लीक: आंदोलन को मिली धार
शुरुआत में सिर्फ एक डिजिटल मज़ाक समझे जाने वाले इस page को असली ताकत तब मिली जब देशभर में NEET-UG (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) और अन्य परीक्षाओं में paper leak की खबरें सामने आईं, साथ ही CBSE की 'online on screen marking' (OSM) प्रणाली को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ। लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग गया, और कई हताश छात्रों की आत्महत्या की दुखद खबरें भी आईं। इसके बाद CJP सिर्फ एक मीम पेज नहीं रह गई, बल्कि पेपर लीक की जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने वाला एक वास्तविक जन-आंदोलन बन गई।
CJP का विज़न प्रमुख मांगें
CJP की Tagline है "Voice of the Lazy & Unemployed" (आलसी और बेरोज़गारों की आवाज़) और "व्यवस्था द्वारा भुला दिए गए लोगों की पार्टी"। व्यंग्यात्मक अंदाज़ के बावजूद, पार्टी की मांगें गंभीर हैं। इनमें प्रमुख हैं:
1. Neet, UPSC, SSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में 'Zero Paper Leak' policyऔर national testing agency का पुनर्गठन।
2. परीक्षा घोटालों की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
3. Paper leak और परीक्षा संबंधी तनाव में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवज़ा और शिक्षा ऋण माफ़ी।
4. जजों के सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद राज्यपाल या राज्यसभा जैसे राजनीतिक पदों पर नियुक्ति पर रोक, ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनी रहे।
5. Graduate युवाओं के लिए सम्मानजनक रोज़गार की गारंटी पार्टी इसे देश का एक बड़ा संकट मानती है।
6. अंबानी और अडाणी समूह के स्वामित्व वाले media chennels के licence रद्द करने की मांग यह पार्टी की सबसे तीखी और विवादित मांगों में से एक है।
CJP खुद को "धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक और युवाओं का मोर्चा" बताती है, और यह साफ कहती है कि वह पारंपरिक/मौजूदा नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल नहीं करेगी। पार्टी का यह भी कहना है कि वह चुनाव आयोग में अब तक एक औपचारिक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत नहीं है वह खुद को एक "दबाव मंच" (pressure platform) के तौर पर पेश करती है।
आंदोलन की समयरेखा
पहला जंतर-मंतर प्रदर्शन (6 जून 2026)
अमेरिका से लौटने के बाद दीपके सीधे दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। दीपके के अपने दावे के मुताबिक, इस एक-दिवसीय प्रदर्शन में करीब 6,000-7,000 छात्र और अभिभावक जुटे, जिसमें NEET paper leak की जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई गई। प्रदर्शन के बाद दीपके अपने गृहनगर लौटे, जहां परिवार ने उनका स्वागत किया और पुलिस ने घर की सुरक्षा बढ़ा दी।
दूसरा जंतर-मंतर प्रदर्शन (20 जून 2026)
दिल्ली पुलिस से औपचारिक अनुमति लेकर CJP ने दोपहर 1 बजे जंतर-मंतर पर दूसरा, बड़ा प्रदर्शन किया, जिसमें कई राज्यों से छात्र शामिल हुए। इस प्रदर्शन के बाद संगठन ने जंतर-मंतर पर एक अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया, जो हफ्तों तक चलता रहा।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल (28 जून 2026 से)
लद्दाख के जाने-माने शिक्षा सुधारक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक भी CJP के समर्थन में आगे आए और 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन hunger strike शुरू कर दी, जिसकी मुख्य मांग शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवज़ा थी। हफ्तों तक चली इस भूख हड़ताल के दौरान उनकी सेहत लगातार बिगड़ती गई, जिसके चलते विपक्षी नेताओं और कई जानी-मानी हस्तियों ने उनसे अनशन खत्म करने की अपील की लेकिन वांगचुक अड़े रहे।
18-20 जुलाई: अस्पताल, अनशन और 'चलो संसद' मार्च
18 जुलाई को, अपनी भूख हड़ताल के 21वें दिन, दिल्ली पुलिस वांगचुक को ज़बरन जंतर-मंतर से उठाकर सफदरजंग अस्पताल ले गई। इसके तुरंत बाद दीपके ने संविधान की प्रति हाथ में लेकर खुद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान कर दिया, और देशभर के नागरिकों से अपील की कि वे अपने-अपने ज़िले में एक "जंतर-मंतर" बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें।
20 जुलाई को, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, CJP के आह्वान पर हज़ारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर 'चलो संसद' मार्च के लिए निकले। भारी बारिश, कई परतों की बैरिकेडिंग और नई दिल्ली इलाके में धारा 163 लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारी constitutional club, पटेल चौक, शास्त्री भवन और संसद मार्ग जैसे इलाकों तक पहुंचे, जहां पुलिस से झड़प हो गई। पुलिस ने आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, पुलिस के मुताबिक प्रदर्शनकारियों की तरफ से पथराव हुआ, हालांकि कुछ वीडियो में सुरक्षाकर्मियों को भी पत्थर फेंकते दिखाया गया, और इस बारे में अलग-अलग दावे हैं कि झड़प असल में शुरू किसने की। इस टकराव में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 से ज़्यादा जवान घायल हुए जिनमें कई IPS अधिकारी भी शामिल थे, दर्जनों प्रदर्शनकारी भी घायल हुए, और 70 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस की दो बसें क्षतिग्रस्त हुईं, जनपथ पर कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की खबर आई, और मध्य दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। खुद दीपके को भी कार्रवाई के दौरान कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया। बाद में पुलिस ने जंतर-मंतर का पूरा धरना स्थल खाली करा दिया, जिसमें वांगचुक का अब खाली पड़ा भूख-हड़ताल मंच भी शामिल था।
अपनी भूख हड़ताल शुरू करने के करीब ढाई दिन बाद, 20 जुलाई की शाम को दीपके ने सोनम वांगचुक के अस्पताल से भेजे अनुरोध पर अपना अनशन तोड़ा इस मौके पर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो मौजूद थीं। लगभग उसी वक्त, 23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे आइसा (AISA) के तीन छात्र कार्यकर्ताओं ने भी सरकारी प्रतिनिधियों के जूस पिलाने पर अपना अनशन खत्म किया हालांकि छात्रों ने साफ किया कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक उनका देशव्यापी विरोध जारी रहेगा। अभिनेत्री शबाना आज़मी, अभिनेता प्रकाश राज, सांसद मनोज झा और CPI(M) के वरिष्ठ नेता बृंदा करात व एम.ए. बेबी सहित कई सार्वजनिक हस्तियां प्रदर्शन के समर्थन में पहुंचीं।
इसी दौरान CJP के प्रतिनिधिमंडल (सौरभ दास और आशुतोष रांका) ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात कर तीन प्रमुख मांगों का ज्ञापन सौंपा वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाए, शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें, और आत्महत्या करने वाले NEET छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये मुआवज़ा मिले। नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से धरना समाप्त करने की अपील की, सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल धरना ज़बरन हटाने के पक्ष में नहीं है, और CJP का कहना है कि सरकार अब बातचीत के लिए तैयार दिख रही है।
21 जुलाई 2026 तक उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक अब भी सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और उनका कहना है कि उनका अनशन जारी रहेगा। सरकार और आंदोलन के बीच स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, और पिछले तीन दिनों में जिस तेज़ी से हालात बदले हैं, उसे देखते हुए आगे भी नए घटनाक्रम की संभावना है।
CJP को फंडिंग कौन करता है?
दीपके बार-बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि CJP किसी कॉर्पोरेट घराने, उद्योगपति या राजनीतिक दल से कोई चंदा नहीं लेती पार्टी की आधिकारिक website पर भी यही दावा किया गया है कि membership पूरी तरह मुफ़्त है और कोई corporate donation स्वीकार नहीं किया जाता। Party की website और घोषणापत्र को बनाने में AI टूल्स (Claude और ChatGPT) का इस्तेमाल किया गया, जिससे शुरुआती खर्च लगभग शून्य रहा। इसके अलावा, बिना किसी paid promotion के, सिर्फ re-share के दम पर पार्टी के instagram followers एक हफ्ते के भीतर करोड़ों में पहुंच गए। धरनों के दौरान sound system, banner और पानी जैसी बुनियादी ज़रूरतों का खर्च स्थानीय समर्थक और शामिल छात्र आपस में मिलकर उठाते रहे हैं।
हालांकि, इस तेज़ रफ़्तार लोकप्रियता पर सवाल भी उठे हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव तेजिंदर बग्गा जैसे आलोचकों ने आरोप लगाया कि instagram followers की यह संख्या फर्ज़ी हो सकती है, फॉलोअर्स की सटीक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित संख्या फिलहाल सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है।
चुनौतियां और आलोचनाएं
जितनी तेज़ी से CJP का उभार हुआ, उतनी ही तेज़ी से इसे कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा:
सरकार ने मई 2026 में ही CJP के आधिकारिक X account को राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर block कर दिया था, हालांकि party ने नया account बनाकर काम जारी रखा।
followers की संख्या को लेकर फर्ज़ी account होने के आरोप लगे।
दीपके की जातीय पहचान को लेकर एक टिप्पणी विवादों में घिरी, जिसे कुछ लोगों ने रूढ़िबद्ध और कुछ ने ईमानदार आत्म-स्वीकृति बताया इस बहस ने यह भी दिखाया कि जाति का सवाल इस आंदोलन की चर्चा में कितना जीवंत बना हुआ है।
20 जुलाई के 'चलो संसद' मार्च में हुई हिंसा को लेकर भी सवाल उठे जहां CJP समर्थक इसे पुलिस की अत्यधिक सख्ती का नतीजा बताते हैं, वहीं अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की तरफ से हुए पथराव और संपत्ति को नुकसान का हवाला दिया। घटनाक्रम की सिलसिलेवार और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
दीपके की अपनी भूख हड़ताल महज़ ढाई दिन में खत्म हो जाने की तुलना वांगचुक की तीन-हफ्तों लंबी भूख हड़ताल से करते हुए भी कुछ हलकों में टिप्पणियां हुईं हालांकि यह अनशन वांगचुक के अपने अनुरोध पर ही तोड़ा गया था, अपनी मर्ज़ी से नहीं।
यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि CJP भविष्य में चुनाव आयोग में एक औपचारिक पार्टी के तौर पर पंजीकरण कराएगी, या सिर्फ एक दबाव समूह के रूप में सक्रिय रहेगी।
निष्कर्ष
Cockroach janta party और अभिजीत दीपके की कहानी बीते ढाई महीनों में भारतीय राजनीति और युवा-लामबंदी की सबसे असामान्य कहानियों में से एक बन चुकी है। जो शुरुआत एक अदालती comment पर डिजिटल तंज़ के तौर पर हुई थी, वह आज दिल्ली की सड़कों पर पुलिस-प्रदर्शनकारी झड़प, एक कार्यकर्ता की अस्पताल में भर्ती, और केंद्र सरकार के साथ सीधी बातचीत तक जा पहुंची है।
CJP आगे चलकर एक औपचारिक चुनावी ताकत बनेगी, या सिर्फ एक दबाव समूह के तौर पर सीमित रह जाएगी यह अभी कहना जल्दबाज़ी होगी। लेकिन इतना तय है कि इसने यह दिखा दिया है कि आज के भारत में social media, AI टूल्स और व्यंग्य के सहारे भी एक बड़ा राजनीतिक मंच खड़ा किया जा सकता है भले ही उसकी असल राजनीतिक ताकत, आंतरिक विवाद और आगे की राह को लेकर सवाल बरकरार हों।
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