Curruption in Medical Reality of Doctors in India Doctors ki sacchai
भारत में डॉक्टर को भगवान कहा जाता है लेकिन इस भगवान का चढ़ावा हर कोई नहीं चुका सकता। यहाँ हर 1,457 मरीज़ों पर केवल एक सरकारी डॉक्टर है, और उस एक डॉक्टर की भी नीयत का कोई guarantee नहीं। अधिक जनसंख्या होने के कारण यहां बिमार होने के chance भी बढ़ जाते हैं जिस से बचाने की जिम्मेदारी doctors की होती है। भगवान का तो पता नहीं लेकिन भारत में डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप कहा जाता है क्योंकि डॉक्टर बहुत लोगो का जीवन बचाते हैं। भारत में डॉक्टर को भगवान तो कहा जाता है लेकिन इस भगवान का बिल बहुत लंबा चौड़ा होता है। Corona के time पर doctors को सभी ने अपने सिर पर बैठा लिया था ऐसा लग रहा था जैसे सम्पूर्ण मानव जाति को बचाने की जिम्मेदारी केवल doctors की थी, प्रशासन, PWD, चपरासी, पुलिस बल और सरकार तो जैसे कुछ करती ही नहीं है।
आज मैं डॉक्टर्स के उस रूप के बारे में भी बताना चाहता हूं जो अब तक public से अनजान है, मेरा उद्देश्य किसी भी प्रोफेशन को गलत ठहराना नहीं है बल्कि आप सब का ध्यान इस ओर आकर्षित करना है कि हर profession का कोई positive तो कोई negative side भी होता है।
भारत में अभी भी डॉक्टरों की कमी है यहां की बीमारी को देखते हुए जिस प्रकार भारत में जनसंख्या में वृद्धि हुई है उसी ratio में डॉक्टर की वृद्धि नहीं हुई जितने भी डॉक्टर्स थे उन पर ही और अधिक pressure पड़ता है। लेकिन ऐसा नहीं हैं, सरकारी हॉस्पिटल्स में जितने भी डॉक्टर्स हैं उतने doctors लोगों का इलाज करने के लिए पर्याप्त हैं अगर सभी डॉक्टर्स अपनी 8 घंटे की duty बिल्कुल ईमानदारी से करें तो treatement अच्छा किया जा सकता है, लेकिन duty को कोई ठीक से करना नहीं चाहता। क्योंकि डॉक्टर्स का मानना है कि एक बार किसी तरह सरकारी डॉक्टर बन जाए उस के बाद कौन पूछता है बस 8 घंटे time pass किया और निकल लिए।
कुछ सरकारी डॉक्टर तो बहुत अकलमंद होते है, सरकारी नौकरी के 8 घंटे पूरे करने के बाद भी प्राइवेट क्लिनिक चलाते हैं, जो डॉक्टर्स स्वयं की clinic नहीं चला पाते वे अपना कुछ टाइम प्राइवेट हॉस्पिटल्स में operations कर के एक्स्ट्रा income बना लेते हैं और कुछ Pro level doctors तो सरकारी 8 घंटो में भी time निकल कर 2 - 4 patients को नाप देते हैं।
प्राइवेट doctors को इस मामले में थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि प्राइवेट हॉस्पिटल्स में उनके उपर एक तलवार सी लटकती रहती है। लेकिन यहां भी patients के साथ बहुत शोषण किया जाता है छोटी सी बीमारी का बहुत मोटा दाम वसूला जाता है। गरीब तो क्या middle class व्यक्ति की भी कमर अच्छे से टूट जाती है।
मेडिकल line में भी ठगी का अच्छा नेटवर्क चलता है, एक middle class family में अगर एक बच्चे को खांसी जुखाम जैसी कोई छोटी मोटी बीमारी होती हैं तो पहले डॉक्टर्स की consultation fees लगभग ₹500 फिर दावा का खर्च लगभग ₹1000 से ₹1200 इस तरह से सभी level से गुजरने पर line में खड़े अंतिम व्यक्ति को छोटी बीमारी के लिए ₹1000 - ₹1500 खर्च करने पड़ते हैं जो बीमारी केवल एक cough syrup से ठीक हो सकती थी। और अगर कहीं किसी कारण से आप प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती हो जाते हैं तो आप से प्रतिदिन की वसूली होटल रूम की तरह अलग से की जाएगी जो hotel room से बहुत अधिक होगी। असलियत में हॉस्पिटल यम के घर के समान है यहां से कुछ बदकिस्मत लोग तो घर लौट कर आ ही नहीं पाते और जो लौट आते हैं 4 नई बिमारियों की शंका साथ में ले आता है ।
आजकल तो doctors केवल उस दवा को prescribe करते हैं जिस company से उन्हें बढ़िया सा gift मिला हो या फिर उस medicine में अच्छा खासा profit percentage हो। ऐसे doctors को patients की भावनाओ से कोई फर्क नहीं पड़ता।
एक कहावत है "हकीम का यार, रहे सदा बीमार" आज तक युवा पीढ़ी इस कहावत को नही समझ पाएगी । मैं खासकर उस डॉक्टर की बात कर रहा हूं जो बीमारी का कारोबार कर रहे है, बीमारी को तो जैसे धंधा बना दिया है । Private hospitals में दवाओं की भी अच्छी गुंडागर्दी चलती है क्योंकि दवा आपको उनके ही medical store से लेनी पड़ती है चाहे वह दवा कितनी ही मांगनी क्यों न हो, आपको दवा लेने के लिए force किया जाता है क्योंकि उन दवाओं पर मोटा margin होता है जो कि बिलकुल unethical है, उनके सामने दवाओं और जेनेरिक दवाओं की तो कोई औकात ही नहीं है, इनका नाम सुनते ही जैसे उनको सांप सूंघ जाता है।
सिर्फ कुछ पैसे की वसूली के लिए मृत व्यक्ति को oxygen लगा कर अधिक दिनों तक भर्ती दिखा कर खूब पैसा छापा जाता है, किसी प्रेगनेंट महिला, जिसकी normal delivery भी की जा सकती थी उस का भी कुछ पैसों के लिए पेट काट कर सर्जिकल operation कर दिया जाता है और पीड़ित व्यक्ति इसलिए कुछ नही कर सकता क्योंकि वह किसी को खोने से और कुछ अनहोनी हो जाने से डरता है इसलिए वह घर-जमीन बेच कर भी पैसे जुटता है। न जाने कितने लोग केवल डॉक्टर्स की लापरवाही के कारण ही अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं क्योंकि डॉक्टर्स की लाइन में murders को मर्डर नहीं कहा जाता यहां केवल एक sorry से काम चल जाता है शायद इसलिए मेडिकल लाइन में इसे practice का नाम दिया जाता है।
मैं हर उस ईमानदार डॉक्टर का सम्मान करता हूं जो अपना काम ईमानदारी से करते हैं, कुछ डॉक्टर्स तो अपनी जान लगा कर भी patients को आखिरी सांस तक बचाने का काम करते हैं।
मैं यह नहीं कहना चाहता कि doctors सभी का इलाज ₹1 में करना शुरू कर दें, या treatment छोड़कर लोगों पर परोपकार करने निकल पड़ें लेकिन unethical practices को कुछ हद तक definately कम किया जा सकता है अपनी duty ठीक से की जा सकती है। देश में ऐसे भी कई doctors हैं जो आज भी लोगों को generic दवाओं से ठीक कर रहें हैं, कुछ doctors लोगों को reasonable price में ठीक कर देते हैं और ऐसे डॉक्टर्स को लोग याद भी रखते हैं। असली भगवान वो है जो किसी को पता न चले, फिर भी काम करता रहे।
अच्छा इसी में है कि डॉक्टर को भगवान का दर्जा देना बंद कीजिए तभी वो इंसान की तरह जवाबदेह होगा।"
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