Why People Fail In Love, Reasons, Career vs Love, Confussion क्यों लोग प्रेम में असफल होतें हैं
प्रेम अब सिर्फ आँखों से नहीं, screens से भी होता है। WhatsApp का last seen, Instagram की story, यह सब उसी बेचैनी की नई शक्ल है। जब रात के दो बजे नींद छोड़कर आप किसी की online activity ट्रैक करते हैं, तो जान लीजिए यह प्रेम नहीं, एक धीमी आत्महत्या है आपकी नींद की, आपके सपनों की लेकिन प्रेम करने वालों को इन सब की परवाह कहां।Science Behind Love :
मुझे कई बार feel होता है कि प्रेम पहले दिल की धड़कन बढ़ाता है, फिर career की रफ़्तार घटाता है। बहुत से students अपना बहुत सारा time love-लपाटे में गवां देते हैं फिर आगे life में बहुत पछताते हैं, इस article से मैं कोशिश करूँगा कि, ऐसे लोगों की आँखें खुल जाएँ। किसी को देख कर आपके brain में prefrontal cortex काम करना बंद कर दे और भावनाओं का ज्वार तर्कशक्ति को सुला दे, किताबों के पन्नों पर जब किसी का चेहरा छपने लगे, dopamine, oxytocin जैसे chemicals release हो रहें हो तो समझ लेना कि आप प्रेम के भंवर में फंस चुके हैं और आपके करियर की स्याही भी सूखने वाली है। बेचारा दिल तो ऐसे ही बदनाम है सारा दोष तो Hippocampus और Amygdala का ही है।
हम में से बहुत लोग प्रेम-सम्बन्धों में होंगे। स्वाभाविक है, कुछ गलत नहीं। भावनाओं से खेलने वाले लोगों को अगर किनारे करें, तो ऐसे लोगों की भी कोई कमी नहीं है, जो केवल एक व्यक्ति के इंतज़ार में सारी उमर यूंही गुज़ार देते हैं।
धीरे-धीरे स्कूल की boundary से उठकर ये प्यार college की canteen की तरफ बढ़ता है, उसी मात्रा में अपने साथी को लेकर Insecurity और Possessiveness भी बढ़ती है। हम अनजाने में ही सही पर अपने साथी पर dominant होने लगते हैं, जो कहीं न कहीं हमारे ही सम्बन्ध में कटुता को बढ़ाने का काम करता है।
हम नहीं चाहते कि, वो किसी और से friendship करे या वो किसी और के साथ comfortable हो। हम सामने वाले की ज़िंदगी मे इतना घुस जाते हैं कि, ये भूल जाते हैं कि, वो एक अलग इंसान है और उसकी हम से अलग भी एक ज़िन्दगी है, family है, उसके भी अपने अधिकार हैं, जो उसे स्वेच्छा से चीज़ों और सम्बन्धों के चुनाव का अवसर देते हैं।
हम प्रेम के उस शिखर पर पहुँच जाते हैं जहाँ सामने वाले का अस्तित्व हमें अपना विस्तार लगने लगता है। हम भूल जाते हैं कि हर इंसान एक स्वतंत्र इकाई है। जिसे हम 'फिक्र' कहते हैं, वह धीरे-धीरे 'नियंत्रण' (control) बनने लगती है। और याद रखिये, जहाँ नियंत्रण शुरू होता है, वहाँ से प्रेम की विदाई तय है।
हमारे प्रेम की height इतनी अधिक हो जाती है कि, कई बार सामने वाले को घुटन होने लगती है। हमें ये गलत नहीं लगता क्योंकि हमें लगता है कि, हम सामने वाले की अच्छाई के लिए डांट या बोल रहे हैं और आगे चल कर सब ठीक हो जाएगा।
कुल मिलाकर फिर एक वक्त आता है कि, कुछ ठीक नहीं चलता। उसके घर से निकलने से लेकर घर में वापस घुसने तक हमारी जान उसी के इर्द गिर्द अटकी रहती है। उसका ध्यान रखने की चिंता में हम अपना ध्यान रखना भूल जाते हैं, घर में किसी भी काम में मन नहीं लगता, किसी भी काम को करते-करते उस के बारे में सोच-सोच कर हँसने लगते हैं, friends, family और अपने आप को time नहीं देते और धीरे-धीरे सम्बन्धों में दरार पड़ने लगती है।
जब कॉलेज खत्म होता है, फिर शुरु होती हैं असल जिंदगी की लड़ाई। लड़की कहती है कि, उसके घर वाले लड़का देख रहें हैं और आप परेशान। अरे, बाबू शोना के चक्कर में कभी आपने ये सोचा ही नहीं कि, प्यार करने के पैसे भी लगते हैं। प्यार करना तो free है लेकिन प्रेम करने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है। फिर आप सोचतें हैं ये कि, क्या ये वही लड़की है जो आज अपने परिवार के खिलाफ जाने से इनकार कर रही है, जिसने कभी क्या क्या वादे किए थे, साथ जीने मरने की कसमें खाई थी फिर आप सामना करतें हैं असल जिंदगी से।
सामाजिक संरचना के कारण लड़कियों पर शादी का दबाव जल्दी आता है, जबकि लड़कों पर 'कमाऊ' होने का बोझ। अंत में दोनों ही अपनी परिस्थितियों के हाथों मजबूर हो जाते हैं।" जिस खिड़की से गरीबी दस्तक देती है उसी खिड़की से प्रेम दबे पांव बाहर निकल जात है। दुनिया सिर्फ उगते सूरज को सलाम करती है, और बेरोजगार का प्रेम अक्सर मोहल्ले की कहानियों में सिमट कर दम तोड़ देता है।"
भारत में लड़कियों के लिए career बनाना optional हो सकता है लेकिन लड़कों के लिए तो ऐसा कोई option भी नहीं है उन्हें तो अपना career आज नहीं तो कल बनाना ही है।
खैर अब आपके जीवन में एक अधूरापन आ चुका है, अचानक से बातें बदल जाती हैं और जो कभी 'बाबू मैं आपके बिना मर जाउंगी' करती थी वो 'ज़िन्दगी में practical होना भी ज़रूरी होता है' जैसे बड़े-बड़े dialogues बोलने लगती हैं। प्रेम में हम अक्सर दूसरे को खुश करने के चक्कर में अपनी Originality खो देते हैं। जब रिश्ता टूटता है, तो हमें दुख इस बात का नहीं होता कि वो चला गया, बल्कि इस बात का होता है कि "मैं अब खुद को नहीं पहचानता। प्रेम में झुकना बुरा नहीं है, लेकिन इतना झुक जाना कि आप अपना अस्तित्व ही खो दें, वह प्रेम नहीं 'आत्मसमर्पण' है। जब आप किसी के लिए झुकते हो, तो शुरुआत में यह प्रेम लगता है। लेकिन जब आप इतना झुक जाते हो कि आप खुद को आईने में नहीं, किसी दूसरे की आँखों में ही खोजने लगते हो तब यह अब प्रेम नहीं, पहचान की हार होती है।
अब आप मूर्खों की तरह उसका मुँह निहारते हैं, क्योंकि आप एक उम्मीद लगाए बैठे थे उस से, और जहां उम्मीद है वहां दुख है अब आप खुद में ठगा सा महसूस करते हैं और सोचते हैं कि, 'क्या ये वही है जिसके पीछे मैंने अपना इतना कीमती वक़्त गँवाया?' 'क्या ये वही है, जिसकी मैंने बच्चों वाली हरकतें, नख़रे बर्दाश्त किए हैं?
तब आपको परमज्ञान की प्राप्ति होती है कि, अगर मैंने ये वक़्त और ध्यान अपने ऊपर लगाया होता और अपने career पर ध्यान दिया होता, तो अपनी बेगम किसी दूसरे के किले में नहीं जा रही होती। अब आप माने या न माने आपकी प्यार की पतंग कट चुकी है मेरे दोस्त ! Love is so short, forgetting is too long, the more we try to forget her, the more we got haunted by the memories we had passed together.
कुल मिलाकर इतनी लम्बी कहानी का निष्कर्ष यही है कि, सबसे पहले अपने आप पर, family पर और सबसे जरूरी अपने career पर ध्यान दो जल्द से जल्द settle हो जाएं फिर अपनी life जैसे जीना चाहते है वैसे जियें। जो व्यक्ति खुद से प्रेम नहीं कर सकता और अपनी प्रगति की चिंता नहीं कर सकता, वह किसी और के जीवन में मूल्य (value) कैसे जोड़ पाएगा?" अक्सर छात्र यह भूल जाते हैं कि एक सफल व्यक्ति के पीछे ही दुनिया भागती है।
Moral of the story:
प्रेम बुरा नहीं है, पर प्रेम का 'समय' गलत हो सकता है। जब आपकी प्राथमिकताएं धुंधली होने लगें और आपकी किताबें आपको बोझ लगने लगें, तो समझ लेना कि आप प्रेम नहीं कर रहे, बल्कि अपनी सफलताओं की आहुति दे रहे हैं। पहले खुद को इस काबिल बनाएं कि आप किसी की जिम्मेदारी उठा सकें, क्योंकि वादों से पेट नहीं भरता और यादों से भविष्य नहीं बनता। उसने वादा किया था साथ जीने का और आपने वादा किया था खुद से, बड़ा बनने का। अंत में दोनों वादे टूटे, लेकिन एक की भरपाई हो सकती है, दूसरे की नहीं। टूटा हुआ दिल भी धड़कता है बस उसे अब सही दिशा में धड़कने दो।
अंततः, प्रेम को कोसना छोड़िए। वह इंसान गलत हो सकता था, वह समय गलत हो सकता था, पर वह एहसास कभी गलत नहीं था। उस दर्द को अपनी ताकत बनाइये। जिस दिन आप अपने लक्ष्य की चोटी पर खड़े होंगे, उस दिन आपको समझ आएगा कि उस 'पतंग का कटना' दरअसल आपकी उड़ान के लिए कितना ज़रूरी था।
Love Never Fails, People Fail In Love मतलब, प्रेम असफल नहीं होता, व्यक्ति प्रेम में असफल होता है क्योंकि उसने प्रेम को लक्ष्य समझ लिया, जबकि प्रेम केवल एक यात्रा का हिस्सा था।" अपनी life में प्रेम की जगह रखें, लेकिन प्रेम की अधिकता से बचें, इसमें डूबे न रहें या शादी के card में मिले हुए पीले धागे से अपना career start करें और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाएं और कुछ acheive कर के दिखाएं।

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