Mira Bai chanu biography in Hindi mira bai chanu age weight networth education मीरा बाई चानू जीवनी सैखोम मीराबाई चानू: हर हार के बाद एक नया Record गढ़ने वाली योद्धा
कुछ एथलीट पदक जीतते हैं, और कुछ अपनी हार को ही अगली जीत की बुनियाद बना लेते हैं। सैखोम मीराबाई चानू दूसरी किस्म की खिलाड़ी हैं। मणिपुर के एक छोटे-से गाँव से निकलकर Tokyo Olympics के podium तक, और वहाँ से Paris की एक करारी नाकामी से गुज़रकर फिर Glasgow में तीसरी बार Commonwealth Gold तक उनका सफ़र इस बात का सबूत है कि असली दमखम शरीर में नहीं, इरादे में होता है।
प्रारंभिक जीवन और परिवार
मीराबाई का जन्म इम्फाल के पास बसे नोंगपोक काचिंग नाम के गाँव में एक साधारण मेइती परिवार में हुआ। पिता सैखोम कीर्ति मेइती लोक निर्माण विभाग में एक छोटे पद पर काम करते थे, और माँ सैखोम ओन्ग्बी तोंबी लेइमा घर संभालती थीं। छह भाई-बहनों में सबसे छोटी मीराबाई का बचपन आर्थिक तंगी के साये में बीता, मगर परिवार का साथ कभी कम नहीं पड़ा।
एक किस्सा अक्सर दोहराया जाता है 12 साल की उम्र में मीराबाई ने अपने भाई से भी भारी लकड़ी का गट्ठर उठाकर घर तक पहुँचा दिया था। शायद उसी पल परिवार को पहली बार अंदाज़ा हुआ कि इस दुबली-सी लड़की के भीतर कितनी ताकत छुपी है।
शिक्षा
मीराबाई की शुरुआती पढ़ाई नोंगपोक काचिंग और इम्फाल के स्थानीय स्कूलों में हुई। बचपन से ही उनका मन किताबों से ज़्यादा मैदान की तरफ खिंचता था, और जैसे-जैसे Weightlifting की तरफ उनका रुझान बढ़ा, उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा खेल के अभ्यास में झोंकना शुरू कर दिया।
करियर की यात्रा: गिरना, टूटना, और हर बार पहले से मज़बूत लौटना
शुरुआत में मीराबाई का सपना Archery में करियर बनाने का था, लेकिन इम्फाल के एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में Weightlifting Hall देखने के बाद उनका रुझान बदल गया। भारत की दिग्गज Weightlifter कुंजरानी देवी उनकी प्रेरणा बनीं।
2014, Glasgow मीराबाई ने Commonwealth Games में पहली बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर कदम रखा और 48 kg category में Silver जीता।
2016, Rio Olympics यहीं से कहानी में पहला बड़ा मोड़ आया। Clean and Jerk राउंड में मीराबाई एक भी वैध lift पूरी नहीं कर पाईं और प्रतियोगिता से बाहर हो गईं। यह असफलता उन्हें गहरे मानसिक तनाव में ले गई इतना कि उन्होंने खेल छोड़ने तक का मन बना लिया था। कोच विजय शर्मा और परिवार के समझाने पर वे मैदान में लौटीं, इस बार पहले से ज़्यादा दृढ़ता के साथ।
2017, Anaheim World Championship में 48 kg category में 194 kg वज़न उठाकर Gold जीता। Karnam Malleswari के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे दूसरी भारतीय महिला बनीं।
2018, Gold Coast Commonwealth Games में Games Record के साथ Gold (196 kg to 86+110)
अप्रैल 2021, ताशकंद Asian Championship में Clean and Jerk में 119 kg उठाकर World Record बनाया।
Tokyo Olympics 2020 (आयोजित 2021) 49 kg category में 202 kg (87 kg Snatch + 115 kg Clean and Jerk) उठाकर Silver जीता। यह भारत के लिए Weightlifting में दूसरा और महिला वर्ग में पहला Olympic पदक था।
2022, Bogotá World Championship में Silver
2022, Birmingham Commonwealth Games में Games Record के साथ लगातार दूसरा Gold (201 kg to 88+113)
2023 का संकट पीठ, कंधे और कलाई की चोटों ने मीराबाई को 2023 की Asian Championship से बाहर कर दिया। Hangzhou Asian Games भी उनके लिए निराशाजनक साबित हुए Asian Games का पदक आज भी उनकी अलमारी से गायब है। महीनों तक NIS पटियाला में rehabilitation चला।
अगस्त 2024, Paris Olympics करियर का शायद सबसे कड़वा पल। 49 kg category में मीराबाई ने 199 kg (88+111) उठाया, मगर Thailand की सुरोदचना खाम्बाओ से महज 1 kg से पिछड़कर चौथे स्थान पर रहीं — पदक से बस एक कदम दूर। इस हार के बाद Coach विजय शर्मा ने साफ कहा कि मीराबाई का "अधूरा काम" अभी बाकी है।
category में बदलाव Paris के बाद International Weightlifting Federation ने 49 kg Olympic category को ही खत्म कर दिया। मीराबाई और उनके कोच ने Asian Games को ध्यान में रखते हुए 48 kg category में लौटने का फैसला किया।
2025, अहमदाबाद 48 kg category में अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता, Commonwealth Weightlifting Championship में Gold (193 kg to 84+109) जीतकर शानदार वापसी की।
अक्टूबर 2025, Førde, नॉर्वे World Championship में Silver (199 kg 84 Snatch + 115 Clean and Jerk, दोनों National Record)। उत्तर कोरिया की री सोंग-गुम ने World Record के साथ Gold जीता। यह मीराबाई का तीसरा World Championship पदक था और 2022 के बाद पहला।
जुलाई 2026, Glasgow जहाँ से 2014 में उनका अंतरराष्ट्रीय सफ़र शुरू हुआ था, वहीं लौटकर मीराबाई ने इतिहास रच दिया। 48 kg category में 190 kg (85 Snatch + 105 Clean and Jerk) उठाकर Snatch, Clean and Jerk और Total तीनों में Commonwealth Games Record बनाते हुए अपना लगातार तीसरा Commonwealth Gold जीता। यह भारत का उस Commonwealth Games में पहला Gold भी था।
कुल संपत्ति (Net Worth)
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मीराबाई की अनुमानित Net Worth लगभग 8 से 15 करोड़ रुपये के बीच आँकी जाती है। इसका बड़ा हिस्सा सरकारी पुरस्कार राशि, मणिपुर पुलिस की सैलरी और Brand Endorsements से आता है। चूँकि यह आँकड़ा कहीं भी आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं है, इसे केवल एक अनुमान के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
Diet, Exercise और अनुशासन
एक Weightlifter के लिए अनुशासन ही सबसे बड़ी पूंजी होती है। मीराबाई दिन में दो बार, कुल मिलाकर 6 से 7 घंटे तक Training करती हैं जिसमें Snatch, Clean and Jerk, Squats, Deadlift और Core Strength की exercises शामिल हैं। चोट से बचाव के लिए Physiotherapy और Stretching उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा हैं।
चूँकि उन्हें एक तय Weight Category के भीतर रहना होता है, उनकी Diet पर पोषण विशेषज्ञों की कड़ी नज़र रहती है उबला भोजन, चिकन, मछली, अंडे, ताज़े फल, हरी सब्ज़ियाँ और Dry Fruits। Hydration और Electrolytes का ख़ास ध्यान रखा जाता है, और Junk Food या तली-भुनी चीज़ों से पूरी तरह परहेज़ किया जाता है।
Rio की नाकामी के बाद मीराबाई ने खुद को जिस अनुशासन में ढाला, वही आज उनकी सबसे बड़ी ताकत है समय पर सोना, सुबह जल्दी उठना, और कोच के हर निर्देश का अक्षरशः पालन करना।
मीराबाई चानू की कहानी असल में किसी एक पदक की कहानी नहीं है। यह उस ज़िद की कहानी है, जो Rio की टूटन से लेकर Paris के एक किलो के फ़ासले तक, हर बार खुद को फिर से गढ़ती रही। और शायद यही वजह है कि 32 साल की उम्र के करीब पहुँचकर भी, जब ज़्यादातर एथलीट रिटायरमेंट सोचते हैं, मीराबाई अब भी अपने कैबिनेट में एक ख़ाली जगह Asian Games के पदक की जगह भरने का सपना देख रही हैं।
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