Teejan bai biography in hindi Teejan Bai: The Woman Who Turned a Tanpura Into a Weapon (तीजन बाई: तानपूरे को हथियार बनाने वाली स्त्री)
कुछ लोग इतिहास में दर्ज होते हैं, और कुछ लोग खुद इतिहास गढ़ते हैं। डॉ. तीजन बाई इस दूसरी श्रेणी की कलाकार हैं। छत्तीसगढ़ की धूल भरी गलियों से निकलकर जब वे दुनिया के बड़े-बड़े स्टेजों तक पहुँचीं, तो साथ में सिर्फ अपनी आवाज़ और एक तानपूरा लेकर गई थीं बाकी सब कुछ, यानी नाम, पहचान और सम्मान, रास्ते में खुद कमाया। उनकी कहानी सिर्फ एक कलाकार की जीवनी नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि जब कोई इंसान अपने हुनर पर पूरा भरोसा कर ले, तो समाज की सबसे मज़बूत दीवारें भी रेत की तरह बिखर जाती हैं।
Family and Birth (पारिवारिक पृष्ठभूमि और जन्म)
24 अप्रैल 1956 छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले का एक छोटा-सा गाँव, गनियारी। यहीं एक निर्धन परदेशी पारधी (आदिवासी) परिवार में तीजन बाई ने जन्म लिया। पिता हुनुकलाल पारधी और माँ सुखंती बाई के पास न ज़मीन थी, न कोई स्थायी income का ज़रिया। गरीबी उनके घर की स्थायी मेहमान थी। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि जिस घर में रोटी की गारंटी नहीं थी, वहाँ लोककथाओं और महाभारत के प्रसंगों की एक जीवंत परंपरा ज़रूर मौजूद थी। और यही विरासत आगे चलकर तीजन बाई की पूरी ज़िंदगी की दिशा तय करने वाली थी।
Childhood in the Shadow of Poverty (गरीबी की छाया में बचपन)
स्कूल जाना तो दूर, तीजन बाई ने कभी अक्षर पहचानना भी नहीं सीखा। पूरी उम्र निरक्षर रहीं। लेकिन प्रकृति ने उन्हें एक असाधारण memory दी थी। जब वे मात्र पाँच-छह साल की थीं, उनके नाना बृजलाल पारधी रात-रात भर महाभारत के प्रसंग छत्तीसगढ़ी भाषा में गाया करते थे। नन्हीं तीजन झोपड़ी के कोने में दुबककर यह सब देखा-सुना करती थीं, और भीम का पराक्रम उनके बालमन में गहरे उतरता चला गया।
धीरे-धीरे उन्होंने छुप-छुपकर नाना की नकल करनी शुरू कर दी। लेकिन उस दौर के पारधी समाज में किसी लड़की का खुलेआम गाना या मंच पर उतरना पाप के बराबर समझा जाता था। जब यह बात गाँव को पता चली, तो विरोध का तूफान खड़ा हो गया।
Society, Marriage and Excommunication (समाज, विवाह और बहिष्कार)
तीजन बाई के इस "पागलपन" को खत्म करने के लिए मात्र 12 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई। लेकिन शादी भी उनके अंदर की आवाज़ को दबा नहीं पाई। ससुराल में भी जब उन्होंने गाना बंद नहीं किया, तो पति और ससुराल वालों ने सख्त ऐतराज जताया। सामने सवाल था कला या घर? तीजन बाई ने कला को चुना, और नतीजे में उन्हें ससुराल से निकाल दिया गया और पूरे समाज ने उन्हें जात से बाहर कर दिया।
सोचिए, वह दौर कितना क्रूर रहा होगा जिस लड़की ने सिर्फ अपने दिल की सुनी, समाज ने उसे अपराधी की तरह बहिष्कृत कर दिया। लेकिन तीजन बाई ने हार मानने की बजाय गाँव के बाहर एक झोपड़ी बनाई, मजदूरी करके पेट पाला, और अपनी साधना जारी रखी। यही वह मोड़ था जहाँ एक साधारण लड़की ने असाधारण जिद में बदलना शुरू किया।
Pandwani and the Kapalik Style (पंडवानी और कापालिक शैली की क्रांति)
छत्तीसगढ़ में पंडवानी गायन की दो प्रमुख शैलियाँ रही हैं वेदमती, जिसमें कलाकार बैठकर शास्त्रीय ढंग से कथा सुनाता है, और कापालिक, जिसमें कलाकार खड़े होकर, तानपूरे के साथ पूरी ऊर्जा और अभिनय के साथ प्रसंग जीवंत करता है।
कापालिक शैली पर सदियों से सिर्फ पुरुषों का एकाधिकार था। महिलाओं को सिर्फ बैठकर गाने की इजाज़त थी मानो खड़े होना भी एक विशेषाधिकार हो, जो सिर्फ पुरुषों के लिए आरक्षित हो। तीजन बाई ने इस रूढ़ि को तोड़ा और खड़े होकर कापालिक शैली में गाना शुरू किया। उनके हाथ का तानपूरा एक पल में भीम की गदा बन जाता, तो अगले पल अर्जुन का धनुष, और कभी द्रौपदी की वेणी। यह सिर्फ गायन नहीं था, यह एक स्त्री का अपनी शर्तों पर मंच पर कब्ज़ा करना था।
The Turning Point: Habib Tanvir (मोड़ बिंदु: हबीब तनवीर की नज़र)
किस्मत करवट लेती है जब छत्तीसगढ़ के महान रंगकर्मी हबीब तनवीर की नज़र तीजन बाई की प्रतिभा पर पड़ती है। उनके मार्गदर्शन में तीजन बाई को पहली बार बड़े मंच नसीब हुए। जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनका प्रदर्शन देखा, तो वे भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकीं। यहीं से तीजन बाई एक स्थानीय कलाकार से राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ीं।
Her Vision: Art Has No Gender (उनका विजन: कला में कोई लिंग-भेद नहीं)
तीजन बाई की सोच सिर्फ अपनी सफलता तक सीमित नहीं रही। उनका मानना है कि लोक कलाएँ किसी देश की आत्मा होती हैं, और अगर यह मर गईं, तो एक पूरी सभ्यता अपनी जड़ों से कट जाएगी। एक अनपढ़, बहिष्कृत पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने यह साबित किया कि talent की कोई जाति, कोई लिंग और कोई शिक्षा-प्रमाणपत्र नहीं होता। ढलती उम्र में भी उनका मिशन एक ही रहा है अगली पीढ़ी को पंडवानी सिखाना और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को ज़िंदा रखना।
Interesting Facts (रोचक तथ्य)
1. तीजन बाई के हाथ का तानपूरा असल में एक multi-purpose प्रॉप है कभी त्रिशूल, कभी गदा, कभी धनुष।
2. वे पढ़ना-लिखना नहीं जानतीं, फिर भी महाभारत के हज़ारों श्लोक उन्हें ज़ुबानी याद हैं, बिना किसी स्क्रिप्ट के।
3. जिस समाज ने कभी उन्हें जात से बाहर किया था, आज वही समाज उन्हें "छत्तीसगढ़ की शान" मानकर गर्व करता है।
4. तीजन बाई की कहानी दरअसल एक सवाल है हम अपनी असली पहचान (identity) को समाज की मंज़ूरी का मोहताज़ क्यों बना देते हैं? एक निरक्षर, बहिष्कृत लड़की जब सिर्फ अपने हुनर के बूते दुनिया के सबसे बड़े मंचों तक पहुँच सकती है, तो यह हम सबके लिए एक चेतावनी और एक उम्मीद, दोनों है। चेतावनी इसलिए कि हमने कितनी प्रतिभाओं को सिर्फ इसलिए दबा दिया क्योंकि वे "परंपरा" के खिलाफ थीं, और उम्मीद इसलिए कि अगर एक तानपूरा और एक अटूट जिद इतिहास बदल सकते हैं, तो हम भी बदल सकते हैं।
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