Dharmendra Pradhan Biography in Hindi, childhood education, family, political career, vision उज्ज्वला मैन से इस्तीफे तक: धर्मेंद्र प्रधान की सियासी दास्तान
भारतीय राजनीति में कुछ चेहरे शोर मचाकर आगे बढ़ते हैं, और कुछ चुपचाप, कदम-दर-कदम, संगठन की सीढ़ियां चढ़ते हुए सत्ता के गलियारों तक पहुंचते हैं। धर्मेंद्र प्रधान दूसरी किस्म के नेता हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इस वरिष्ठ नेता ने केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, इस्पात, कौशल विकास और शिक्षा जैसे भारी-भरकम मंत्रालय संभाले हैं। ओडिशा की सादगी और दिल्ली की सियासी पेचीदगी—दोनों को एक साथ साधने का हुनर उन्हें बाकियों से अलग खड़ा करता है।
Family: तालचेर की गलियों से
26 जून 1969 को ओडिशा के अनुगुल जिले के तालचेर कस्बे में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान का बचपन ओडिशा की मिट्टी की खुशबू और वहां की रवायतों के बीच गुज़रा। वे चासा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। घर का माहौल शुरू से ही सियासी चर्चाओं से भरा रहा पिता खुद राजनीति में सक्रिय थे, तो जन-समस्याओं और सत्ता की बारीकियों को समझने का मौका उन्हें बहुत कम उम्र में ही मिल गया।
Family & Background: तालचेर की गलियों से एक सियासी विरासत
26 जून 1969 को ओडिशा के अनुगुल जिले के तालचेर कस्बे में जन्मे धर्मेंद्र प्रधान का बचपन ओडिशा की मिट्टी की खुशबू और वहां की रवायतों के बीच गुज़रा। वे चासा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। घर का माहौल शुरू से ही सियासी चर्चाओं से भरा रहा—पिता खुद राजनीति में सक्रिय थे, इसलिए जन-समस्याओं और सत्ता की बारीकियों को समझने का मौका उन्हें बहुत कम उम्र में ही मिल गया।
👨👩👧👦 परिवार: एक स्थापित सामाजिक-राजनीतिक पहचान
💡 घर की यह मजबूत राजनीतिक विरासत ही वह पहली सीढ़ी थी, जिसने धर्मेंद्र प्रधान के आगे के सफर की नींव रखी।
पढ़ाई-लिखाई: सियासत से पहले की ज़िंदगी
पूर्णकालिक राजनीति में उतरने से पहले धर्मेंद्र प्रधान ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। स्कूल और कॉलेज की शुरुआती तालीम तालचेर से हुई, और उसके बाद भुवनेश्वर के मशहूर उत्कल विश्वविद्यालय से उन्होंने Anthropology (मानवशास्त्र) में मास्टर डिग्री हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि यह वही दौर था जब वे छात्र राजनीति से भी जुड़ गए थे पढ़ाई और संगठन-निर्माण, दोनों साथ-साथ चलते रहे।
Political Career: एक लंबा संघर्ष, सफलता की अटूट कहानी
धर्मेंद्र प्रधान का उभार किसी शॉर्टकट का नतीजा नहीं है। यह ज़मीनी स्तर से शुरू हुई एक धीमी मगर मुसलसल चढ़ाई है:
- 1983: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से छात्र राजनीति की शुरुआत। 1985 में तालचेर कॉलेज छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए।
- 1995: ABVP के राष्ट्रीय सचिव बने। इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से जुड़ाव, और 2004 से 2006 तक इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।
- 2000: ओडिशा की पल्लहारा सीट से पहली बार विधायक (MLA) चुने गए।
- 2004: देवगढ़ संसदीय क्षेत्र से जीतकर 14वीं लोकसभा में कदम रखा।
- 2012 एवं 2018: क्रमशः बिहार और मध्य प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे।
- 2024: ओडिशा की संबलपुर लोकसभा सीट से चुनाव जीता।
🏛️ केंद्र सरकार में मंत्रालय संभालना (Cabinet Portfolios)
कैबिनेट में उनका सफर बेहद विविध और महत्वपूर्ण मंत्रालयों से भरा रहा:
- 2014 – 2021: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री (2017 में कैबिनेट रैंक)
- 2017 – 2024: कौशल विकास मंत्री
- 2019 – 2021: इस्पात मंत्री
- जुलाई 2021 – जुलाई 2026: केंद्रीय शिक्षा मंत्री
Vision: चार सिद्धांतों पर टिकी सोच
धर्मेंद्र प्रधान के प्रशासनिक नज़रिए को चार बड़े स्तंभों में समेटा जा सकता है ऊर्जा सुरक्षा और उज्ज्वला योजना के ज़रिए ग्रामीण महिलाओं को धुएं से आज़ादी दिलाना; ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के लिए शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाना; युवाओं को स्किलिंग और अप-स्किलिंग के ज़रिए आत्मनिर्भर बनाना; और पूर्वोदय मिशन के तहत पूर्वी भारत ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल का औद्योगिक विकास करना।
शिक्षा मंत्रालय का दौर: नीतियां और तूफान, दोनों साथ-साथ
जुलाई 2021 में शिक्षा मंत्रालय संभालने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में कई अहम फैसले हुए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को स्कूली स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक लागू करने की रूपरेखा तैयार हुई। सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने के लिए PM SHRI योजना शुरू हुई। भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने के मक़सद से नया राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) जारी हुआ, और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 'कौशल भारत डिजिटल' जैसी पहलें आगे बढ़ीं।
मगर इसी दौर के आख़िरी हिस्से में एक तूफान भी उठा। National Testing Agency (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों के आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी।
Disputes: जब सवाल घर तक पहुंचे
हर बड़े ओहदे के साथ सवाल भी आते हैं, और धर्मेंद्र प्रधान का सफर भी इससे अछूता नहीं रहा। उनकी बेटी नैमिषा प्रधान ने अमेरिका की Tufts University (The Fletcher School) से Law में Master's की पढ़ाई पूरी की। 2026 में जब देश NEET विवाद और छात्र आंदोलनों से जूझ रहा था, तब सोशल मीडिया पर यह सवाल तेज़ी से उठा कि जब शिक्षा मंत्री के अपने बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, तो देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर उनका संदेश क्या है। इस तीखी ट्रोलिंग के बाद नैमिषा को अपना Instagram अकाउंट बंद करना पड़ा।
एक पुराना विवाद 2017 का भी है, जब वे पेट्रोलियम मंत्री थे। आरोप लगा कि उनकी बेटी की विदेश यात्रा के दौरान इस्तेमाल हुए इंटरनेशनल सिम का करीब ₹68,000–70,000 का बिल एक सरकारी कंपनी (PSU) ने चुकाया। विपक्ष ने इसे सत्ता के दुरुपयोग से जोड़ा।
Resign: नैतिक ज़िम्मेदारी का सवाल
2026 की NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक की घटनाओं के बाद देश भर में छात्र संगठनों ने जंतर-मंतर पर व्यापक आंदोलन छेड़ दिया। संसद के मानसून सत्र में हंगामा बढ़ता गया, सड़कों पर छात्रों का गुस्सा उबलता रहा, और आख़िरकार 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा बहाल करना और छात्रों के हितों की हिफाज़त करना उनकी नैतिक ज़िम्मेदारी है। उन्होंने यह भी लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश के युवाओं का भविष्य सियासी विवादों या कानूनी उलझनों में फंसकर बर्बाद हो।
Interesting Facts: धर्मेंद्र प्रधान से जुड़े दिलचस्प तथ्य
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